मंगलवार, 27 जुलाई 2010

सी.बी.आई - कांग्रेस ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन

किसी ने सूचना अधिकार के अन्तर्गत भारत सरकार से यह जानना चाहा है कि भोपाल गैस नरसंहार के बाद जिन दिनों एंडरसन भारत आकर फिर अपने देश ससम्मान भेज दिया गया, उन दिनों राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह से किस-किस ने भेंट की थी और प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किस-किस से फोन पर बात की थी।

सरकार ने बताया है कि जैलसिंह ने उन दिनों एंडरसन नामक किसी व्यक्ति से भेंट नहीं की थी और राजीव गांधी की फोन वार्ताओं का रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। क्या इस बारे में कोई सी.बी.आई जांच करेगी कि प्रधानमंत्री कार्यालय से वह रिकार्ड कब, कैसे, किसने और क्यों गायब किया ?

देश को पूरा विश्वास है कि इसे भी बोफोर्स दलाली के दस्तावेजों की तरह कालीन के नीचे दबा दिया जाएगा, क्योंकि सी.बी.आई का असली अर्थ सेंट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन नहीं, कांग्रेस ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन है।

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