रविवार, 15 अगस्त 2010

14 अगस्त, स्वाधीनता दिवस या....

15 अगस्त के कई समाचार पत्रों ने 14 अगस्त, 2010, शनिवार को सम्पन्न हुए कार्यक्रमों की चर्चा की है। कई स्थानों पर तिरंगा झंडा फहराया गया, जन-गण-मन गाया गया और स्वाधीनता सेनानियों को याद किया गया।

यहां तक तो ठीक है; पर जिन लोगों और पत्रों ने इस कार्यक्रम को ही स्वाधीनता दिवस बना, बता या लिख दिया, उनकी बुद्धि पर मुझे तरस आता है। भारत को स्वाधीनता 15 अगस्त को मिली, 14 को नहीं। 14 अगस्त को आप कोई कार्यक्रम करें, उसमें तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान गायें, इसमें किसी को क्या आपत्ति हो सकती है; पर कम से कम उस दिन को स्वाधीनता दिवस तो न कहें।

मुझे उन सम्पादकों, पत्रकारों और संवाददाताओं से भी नाराजगी है, जो अपनी बुद्धि का प्रयोग कर इसे स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम कह सकते थे; पर उन्होंने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

एक आश्चर्य की बात और भी है। प्रतिवर्ष 15 अगस्त को विद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में ध्वजारोहण होता है। कुछ नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के संदेश पढ़े जाते हैं; पर इस बार 15 अगस्त को रविवार पड़ गया। बहुत से विद्यालयों और कार्यालयों ने छुट्टी को खराब होने से बचाने के लिए यह औपचारिकता भी 14 अगस्त को ही पूरी कर ली। वे भूल गये कि 14 अगस्त स्वाधीनता का नहीं, विभाजन का दिवस है। इसीलिए हमारा जन्मजात शत्रु पाकिस्तान इसे अपना स्वाधीनता दिवस मानता है।

क्या 15 अगस्त के बदले 14 अगस्त को ही स्वाधीनता दिवस मना लेने वालों का यह काम अपराध नहीं माना जाना चाहिए; क्या ऐसे महामानवों के बल पर ही हमारा देश आगे बढ़ेगा ?

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