शनिवार, 8 नवंबर 2014

व्यंग्य बाण : पार्टी उत्थान योजना

चिरदुखी शर्मा जी इन दिनों कुछ ज्यादा ही दुखी थे। अधिकांश लोगों का दुख आंखों से टपकता है; पर उनका दुख स्पंज की तरह शरीर के हर अंग से टपकता रहता था। इस चक्कर में उनका रक्तचाप सोने और चांदी के दामों की तरह लगातार गिरने लगा। दिल की धड़कन मुंबई के स्टॉक एक्सचेंज की तरह चढ़ने लगी। कभी-कभी तो उनका दिल इतनी तेजी से ऊपर-नीचे होता था मानो लुहार की धौंकनी चल रही हो। शर्मा जी के खर्राटों से उनकी मैडम पहले ही परेशान थीं, यह नयी बीमारी और लग गयी।

तुलसी बाबा ने कहा है - धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपत काल परखिये चारी। अतः एक दिन मैंने उनके घर जाकर धरना ही दे दिया। मैंने उन्हें साफ-साफ बता दिया कि यदि वे अपना दुख मुझे नहीं बताएंगे, तो मैं हटूंगा नहीं; चाहे चाय-नाश्ते और भोजन के बाद सोना भी यहीं पड़े। 

मैंने दिन भर में कई बार उन्हें हिलाया-डुलाया, समझाया और फुसलाया, डराया, धमकाया और बहकाया भी; पर वे गुमसुम ही रहे। लेकिन शाम को चाय पीते हुए उनका दुख पिघलने लगा। 

- वर्मा जी, अगर ऐसे ही चलता रहा, तो हमारे प्यारे भारत देश का क्या होगा ?

- क्यों, क्या हुआ शर्मा जी, भारत देश पर तो ऐसा कोई संकट दिखायी नहीं दे रहा। पाकिस्तान और बंगलादेश अपनी घरेलू समस्याओं से ही दुखी हैं, और जहां तक चीन की बात है, तो उसे भी नयी सरकार ने कुछ नियन्त्रित किया तो है।

- तुम्हें तो बस चीन, पाकिस्तान और बंगलादेश ही दिखायी दे रहे हैं। मैं बाहर की नहीं, अंदर की बात कर रहा हूं। 

- अंदर भी काफी कुछ ठीक है। काले धन को वापस लाने के मामले में सरकार जरूर उलझ गयी है; पर बाकी मोर्चों पर तो काम ठीक चल रहा है। डीजल और पैट्रोल के दाम घटने से महंगाई की नाम में भी नकेल पड़ गयी है।

- तुम समझते नहीं वर्मा। मैं अपनी पार्टी की बात कर रहा हूं। जिस महान कांग्रेस पार्टी की 125 साल की गौरवशाली परम्परा रही है। जिसने देश को आधा दर्जन प्रधानमंत्री दिये, उसका यह हाल..।

- इसमें परेशान होने की क्या बात है शर्मा जी। इस सृष्टि में जन्म लेने वाले हर व्यक्ति की मृत्यु होना निश्चित है। सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों का भी ऐसा ही होता है। यदि हमारे देश की महान खानदानी पार्टी मर रही है, तो इसे नियति का खेल मानकर शमशान घाट ले जाने की तैयारी करो। कहो तो लकड़ियों की व्यवस्था मैं करवा दूं ?

यह सुनकर शर्मा जी भड़क गये - बेकार की बात मत करो वर्मा। तुम मेरा दुख घटाने आये हो या बढ़ाने ?

- शर्मा जी, संतों ने कहा है कि वास्तविकता को स्वीकार कर लेने से दुख बढ़ता नहीं, घटता ही है।

- लेकिन मैं चाहता हूं कि हमारी पार्टी फले और फूले। मैडम जी तो बीमार रहती हैं। अब हमें राहुल बाबा से बहुत आशा है।

- पर मुझे लगता है कि राहुल बाबा अंदर ही अंदर नरेन्द्र मोदी से मिले हुए हैं। इसे आप लोग नहीं समझ पा रहे हैं।

- वो कैसे ?

- मोदी ने ‘कांग्रेसमुक्त भारत’ को जो नारा दिया है, राहुल बाबा निष्क्रिय रहकर और उल्टे-सीधे निर्णय लेकर उसे पूरा करने में अपना योगदान दे रहे हैं।

- ये बेकार की बात है।

- आप जो भी कहें; पर केन्द्र में संख्या कम होने से उसे विपक्ष का स्थान नहीं मिल सका। हरियाणा तथा महाराष्ट्र में भी वह नंबर तीन पर चली गयी। ये नरेन्द्र मोदी के ‘कांग्रेसमुक्त भारत’ अभियान में राहुल बाबा का योगदान है या नहीं ?

- वर्मा जी, मेरा दिल मत दुखाओ और ये बताओ कि अवसाद में डूबी कांग्रेस पार्टी को किस वैद्य की दवा दें, जिससे सत्ता की मंडी में फिर से हमारी जय-जयकार होने लगे ? अपने वोट प्रतिशत में लगातार हो रही गिरावट को देखकर हम सब बहुत ज्यादा चिंतित हैं। नये लोग जुड़ नहीं रहे, और पुराने लोग छोड़कर जा रहे हैं। यदि कांग्रेस ऐसे ही सिकुड़ती रही, तो कुछ साल बाद कांग्रेसियों को ढूंढने के लिए दूरबीनें लगानी पड़ंेगी। 

- शर्मा जी, दूरबीन से तो धरती के ऊपर की चीजें ढूंढी जा सकती हैं; पर कांग्रेस तो लगातार गढ्डे में जा रही है। जैसे धरती के भीतर के पानी को आजकल उपग्रह द्वारा ढूंढा जाता है, ऐसे ही..।

- मजाक मत करो वर्मा। मैं पहले ही बहुत दुखी हूं। जरा गंभीरता से बताओ कि हमें क्या करना चाहिए ? 

- इसके लिए आपके दल के नेताओं को मिल बैठकर चिंतन, मनन  और मंथन करना होगा। सब दल के लोग ऐसा करते हैं।

- हमारे दल में भी लगातार ऐसा हो रहा है। लोकसभा चुनाव की हार के बाद एक बड़ी बैठक हुई थी। उसमें यह विचार हुआ कि पार्टी अब बहुत बूढ़ी हो गयी है। इसलिए इसके मूल सिद्धांत और कार्यक्रम में व्यापक फेरबदल होना चाहिए। इसके लिए इटली के एक एन.जी.ओ. को ठेका भी दिया गया था।

- अच्छा फिर. ?

- महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा के चुनावों में हुई फजीहत के बाद दूसरी महत्वपूर्ण बैठक हुई। वह पहली बैठक से भी अधिक बड़ी थी। उसमें इटली वाले एन.जी.ओ. के मुखिया भी आये थे। उनकी रिपोर्ट के आधार पर उस बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय हुआ कि भविष्य में पार्टी में क्या-क्या परिवर्तन किये जाएंगे।

- पर शर्मा जी, यह निर्णय और परिवर्तन लागू कब होंगे ?

- इसका पता तो राहुल बाबा को ही होगा। क्योंकि आजकल पार्टी के ‘पीर बावर्ची भिश्ती खर’ वे ही हैं।

- पर शर्मा जी, मुझे इसका पता है।

- अच्छा, तो बताओ ये परिवर्तन कब होंगे ?

- दिल्ली, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में चुनाव हारने के बाद।

शर्मा जी ने अपना माथा पकड़ लिया। उनका दुख एक बार फिर छलछलाने लगा।